शनिवार, 30 नवंबर 2024

गीत : एक दीप धर आ रे जा उनके द्वारे

 29-10-2024

एक दीप धर आ रे, जा उनके द्वारे 

ओऽ रे दुलारे, ओऽ गीत प्यारे

जाऽऽरे जाऽऽरे, जा रे तू जा रे।


बैठे अँधेरे में, टोटों के घेरे में 

साँझ नहीं बीती है, देर है सबेरे में। 

कैसी दिवाली है, पेट सबका खाली है

आस, आस तोड़ गई, दिन के उजेरे में। 


थाली में खील थोड़े, लेकर खिलौने

एक दीप धर आ रे, जा उनके द्वारे

ओ रे दुलारे, ओ गीत प्यारे...


जिनके बहे खेत, सपने हुए रेत

दाना नहीं घर में, बेबस बहुत हेत।

बैक-लोन हाय, ब्याज है खाए 

साहूकार का बेंत, प्राणऽ पिएँ लेत।


पोटली में बाँध एक, पकवान कुछ देख

दीप संग धर आ रे, जा उनके द्वारे।

ओ रे दुलारे, ओ गीत प्यारे...


जाकर बहुत दूर, करके उसे चूर

माथे पे बिंदी, न माँग में सिंदूर।

पापा की तस्वीर, चुन्नू की तकदीर

सीमा ने सीमा को, कर डाला मज़बूर। 


तीन रंग में रंग, 'जय हिंद' लिख संग

एक दीप धर आ रे, जा उनके द्वारे। 

ओ रे दुलारे, ओ गीत प्यारे..


नैन रतनारे, काजर बिना रे

साजन की वाट जोहि, रोवें किवारे

उमड़ि-घुमड़ि जियरा पे, बिरहिन के हियरा पे

बादर छाए हैं, चहुँओर कारे।


मधुरिम आ'भास का, एक दीप आस का

चौखट पे धर आ रे, जा उनके द्वारे।

ओ रे दुलारे, ओ गीत प्यारे...

©️ सुकुमार सुनील

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