सोमवार, 12 दिसंबर 2022

सजल (मन ज्यों गंगाजल लिख देना)

 

दिनांक - 19-08-2020


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              *सजल*

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समांत- अल

पदांत-  लिख देना

मात्रा-भार- 16

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निश्छल अंतस्तल लिख देना

मन ज्यों गंगाजल लिख देना


पर-पीड़ा का भान हो सके

भाव-विचार सरल लिख देना 


मातृ-भूमि ही सर्वोपरि है 

राष्ट्र-हेतु प्रतिपल लिख देना


विकृत रुप हुआ वसुधा का

पर्यावरण विमल लिख देना 


शब्दों में अति प्रेम प्रकट है

अनुभव में मत छल लिख देना

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       ©️सुकुमार सुनील

         

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