दिनांक - 19-08-2020
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*सजल*
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समांत- अल
पदांत- लिख देना
मात्रा-भार- 16
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निश्छल अंतस्तल लिख देना
मन ज्यों गंगाजल लिख देना
पर-पीड़ा का भान हो सके
भाव-विचार सरल लिख देना
मातृ-भूमि ही सर्वोपरि है
राष्ट्र-हेतु प्रतिपल लिख देना
विकृत रुप हुआ वसुधा का
पर्यावरण विमल लिख देना
शब्दों में अति प्रेम प्रकट है
अनुभव में मत छल लिख देना
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©️सुकुमार सुनील
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