गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

ग़ज़ल (नए साल में कुछ यूँ बहार आए)

 इस विलायती नववर्ष 2018 पर आप सब के लिए मंगलकामनायें करतीं कुछ पंक्तियाँ,,,,,,,,,


नए  साल  में  कुछ  यूँ  बहार  आए

फूलों पे रंगत कलियों पे निखार आए


मिट  जाए  नफरत दिलों से सबके

सबको  सभी  पे  प्यार  आए


छट जाए कोहरा आसमां से गम का

जमीं  पे  खुशी  अपार  आए


हाथ न तंग हो मन में उमंग हो

हम सब संग हों न कोई दरार आए


सूझें नए  पथ  सुगम  हों  पुराने

नया साल ऐसा 'सुकुमार ' आए

©️ सुकुमार सुनील 

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