*प्रयोग पूर्ति -112*
दिनांक-13-08-20
दिन-गुरुवार
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*सजल*
समांत- अने
पदांत - लगे हम
मात्राभार- 14
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गर्त में धँसने लगे हम
मृत्यु पर हँसने लगे हम
हंस थे संवेदना के
व्याल बन डसने लगे हम
मन मरुस्थल हो गया है
रेत पर बसने लगे हम
चीरकर आए वनों को
घास में फँसने लगे हम
हैं शिथिल संबंध सारे
स्वयं को कसने लगे हम
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©️ 〰️ सुकुमार सुनील
फिरोजाबाद
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