सोमवार, 12 दिसंबर 2022

सजल ( तब जा वृंदावन होता है)


विषय - संस्कृति 

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        *सजल*

समांत- अन

पदांत - होता है

मात्राभार- 32

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स्मरण मात्र से ही सुरभित यह तन-मन सावन होता है

प्रत्येक कष्ट का माधव के  चरणों में* समापन होता है


कण-कण में शक्ति समाहित है यह भूमि परम अवतारों की

हमने ही* सत्य-शोध समझा यह सत्य सनातन होता है


संस्कृतियों की है मूल-स्रोत वसुधा भारत की देवमयी

हम गरलकंठ के अनुगामी उर-उर अपनापन होता है 


इत पत्र-पत्र पर वेद-ऋचाएँ पढ़ो ध्यान से सर्जित हैं 

शुचि पुष्प-पुष्प पर उपनिषदों का नित आराधन होता है


तृण-तृण हो प्रेम-पगा रज पा आनंद स्वयं आनंदित हो

वह दिव्य धरा का सरस खण्ड तब जा वृंदावन होता है


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©️ सुकुमार सुनील 

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