गुरुवार, 21 नवंबर 2024

गीत: टेकनपुर में बीते ये दो वर्ष न भूलूँगा

पाया है उत्कर्ष यहाँ यह हर्ष न भूलूँगा


टेकनपुर में बीते ये दो वर्ष न भूलूँगा।




हरा-भरा यह गाँव सरीखा है सेना का बास


अपनेपन का यहाँ मिला है भर-भर कर एहसास।


छोटी - छोटी पहाड़ियों पर जाकर मन बहलाना


नहर किनारे कभी अचानक यों ही चलते जाना।


नईं-नईं बोली-भाषाएँ बहुत सुनूँगा पर


ब्रजबुलि से बुंदेली का स्पर्श न भूलूँगा।


टेकनपुर में...




टीसीपी की और मकोड़ा की हाटें सालेंगीं


हाटों में मिल होतीं बातें उर पीड़ा पालेंगीं।


वह अय्अप्पो का जाना वह पासिंग आउट परेड


विद्यालय के भ्रमण जाएँगे उर-तंत्री को छेड़।


बहुत सुहाने चित्र मिलेंगे जग में मुझको पर


आँखों में अंकित जौरासी दर्श न भूलूँगा।


टेकनपुर में...




पावन प्रांगण विद्यालय का और चहकते बाल


कक्ष-कक्ष लाएगा मन में यादों का भूचाल। 


नई सीख लेकर आएँगे सपनों में प्राचार्य 


सच में याद बहुत आएँगे आप सभी आचार्य।


कर्मभूमि पर और मिलेंगे साथी नये मगर


आप सभी का परम आत्मीय पर्श न भूलूँगा।


टेकनपुर में...


©️ सुकुमार सुनील 

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