बुधवार, 23 नवंबर 2022

गीत (श्रीराम रुष्ट हो जाएँगे)

मर्याद छोड़कर हिंसा में शुचिता के स्वर खो गए अगर

अंतर-सीता का हरण हुआ श्री राम रुष्ट हो जाएँगे।


यह अहम् ईश का भोजन है शुचि स्वयं राम बतलाते हैं

तन का मन का या हो धन का उस पर प्रभु वाण चलाते हैं।


प्रभु राम नाम पावन पुनीत चल प्रेम सहित सुमिरन करलें

इन उन्मादी जयगानों में शुचि शील नष्ट हो जाएँगे।


वे सिंधु स्वयं करुणा के हैं रक्षक सम्पूर्ण चराचर के

वे युद्ध भूमि में भी रिपु को समझाते नीति बिठाकरके


हैं राम राम के स्वयं इष्ट आ बैठ के राम भजन कर लें

सहदम्भ कुटिल उच्चारण में संयम विनिष्ट हो जाएँगे।


उनके चरित्र और जीवन में हिंसा का कोई नहीं ठौर

वे कृपावंत वे गुणागार वे नेह-विमल शुचि-धैर्य-धार


वे अगम अगोचर अविनाशी चल चिंतन और मनन करलें

इन मदमाते जयघोषों में अनुबंध क्लिष्ट हो जाएँगे।

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     ©️सुकुमार सुनील

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